रामनगर में वन विभाग की सैकड़ों हैक्टर जमीन पर मुसलमानों के पक्के मकान बनें ,विभाग खामोश्

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क्या सोची समझी साजिश के तहत कॉर्बेट सिटी रामनगर को मजार जिहाद से घेरा गया ?

राम नगर और आसपास मुस्लिम आबादी जो राज्य बनने के दौरान पन्द्रह हजार भी नही थी बढ़ कर पचपन हजार से ज्यादा हो चुकी है। नैनीताल जिले रामनगर और कालाढूंगी का वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर जिस तरह से मजारे बनाई गई है वो मजार जिहाद का हिस्सा बताई जा रही है। अब कुछ समय बाद रामनगर से हिन्दुओं को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

रामनगर । राम नगर और आसपास मुस्लिम आबादी जो राज्य बनने के दौरान पन्द्रह हजार भी नही थी बढ़ कर पचपन हजार से ज्यादा हो चुकी है। नैनीताल जिले रामनगर और कालाढूंगी का वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर जिस तरह से मजारे बनाई गई है वो मजार जिहाद का हिस्सा बताई जा रही है। अब कुछ समय बाद रामनगर से हिन्दुओं को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।राम के नगर और जंगलों को किस तेजी से मजारों ने फॉरेस्ट की जमीन पर अपने अवैध कब्जे किए इस बात का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है।
उल्लेखनीय है राम नगर का नाम राम की नगरी के रूप में जाना जाता रहा है और यही से कुछ ही दूरी पर सीतावनी भी है, कहा जाता.कि जब भगवान राम से परित्याग होने के पश्चात सीता महा ऋषि वाल्मीकि के साथ वन गई थी तब वे इसी वन में रही थी।रामनगर ढिकुली कत्यूरी वंश की कभी राजधानी भी रहा, आर्यसमाज के संस्थापक महाऋषि दयानंद सरस्वती के चरण भी यहां पड़े। कॉर्बेट सिटी रामनगर मुख्य रूप से गढ़वाल और कुमायूं की व्यापारिक मंडी है और आसपास के गांव लीची आम के फलों के बगीचों के लिए जाने जाते रहे है। संपन्न क्षेत्र होने की वजह से यहां के बगीचों के फलों को तोड़ने और उन्हें बाजार तक लेजाने के कारोबार और कोसी नदी में खनन मजदूरी के लिए यूपी के मैदानी क्षेत्रों के मुस्लिम यहां आए और धीरे धीरे यही कब्जे कर बसते चले गए। लकड़ी और जड़ी बूटी की मंडी के रूप में विकसित राम की नगरी अब पूरी तरह से सामाजिक आर्थिक और धार्मिक रूप से मुस्लिम आबादी वाली हो चुकी है। मुस्लिम आबादी ने अपने पैर जमाने के लिए यहां मस्जिदे तो बनाई लेकिन यहां बड़ी संख्या में अवैध रूप से मजारे भी बना कर अपने कब्जे कर लिए, इस बारे में एक खुफिया रिपोर्ट शासन को भेजी गई है जिसमे लिखा गया है कि शहर राम नगर और आसपास जनसंख्या असंतुलन का खेल हो चुका है। राम नगर और आसपास मुस्लिम आबादी जो राज्य बनने के दौरान पन्द्रह हजार भी नही थी बढ़ कर पचपन हजार से ज्यादा हो चुकी है। नैनीताल जिले रामनगर और कालाढूंगी का वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर जिस तरह से मजारे बनाई गई है वो मजार जिहाद का हिस्सा बताई जा रही है।
पुलिस खुफिया विभाग ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में वन विभाग की कार्य प्रणाली पर ये सवाल भी उठाए है कि कैसे विभागीय लापरवाही की वजह से उत्तराखंड से बाहरी प्रदेशों के लोगो ने जंगलों में आकर वन भूमि पर कब्जे कर मजारे बना ली और बकायदा पक्के निर्माण कर लिए, इस बारे में पुलिस के द्वारा कॉर्बेट पार्क के भीतर बिजरानी जोन में पानियासेल मजार का उदाहरण दिया कि जिस टाइगर रिजर्व के जंगल में आम आदमी के जाने पर मनाही है वहां कॉर्बेट प्रशासन बाहरी लोगो को जाने देता रहा और यहां उर्स भी करवाता रहा,कॉर्बेट प्रशासन ने यहां बिजली भी दे रखी है , हालांकि पिछले दो सालों से होली के दिन लगने वाले उर्स को कॉर्बेट प्रशासन ने कोविड की वजह से अनुमति नहीं दी। कॉर्बेट के जंगल में ढेला रेंज में स्वाल्दे में सड़क किनारे कालू सैय्यद बाबा की मजार पिछले कुछ सालो.में कैसे बन गई? जबकि कालू सैय्यद की दर्जनों मजारे पहले से इन आरोपों के घेरे में है कि एक पीर को कितनी जगह दफनाया गया होगा?
हल्दुआ के जंगल की जमीन में नत्थन पीर बाबा की मजार के बराबर में अब कब्रस्तान भी बन गया है और वन विभाग सोता रहा। रामनगर से लगे कालाढूंगी फॉरेस्ट डिविजन में अवैध मजारों की बाढ़ आ गई है मजार जिहाद के सबूत यहां आसानी से देखे जा सकते है। नवाढ गुज्जर खत्ता में कुछ समय पहले दरगाह शरीफ सेख बाबा नाम से मजार बना दी गई और वन गुज्जर समुदाय ने इसकी शिकायत वन विभाग से भी की थी उनका कहना है कि यहां संदिग्ध लोगो का आना जाना है, इसके बावजूद वन विभाग के बड़े अधिकारी कांग्रेस के बड़े नेता की डर से कोई कार्यवाही नहीं कर पाये, वही वन विभाग की भी खूब कमाई हुई ं।
आज मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या कई गुना बढ़ गई है उन्हें हटाना मुमकिन है। ये सब बाहरी प्रदेश के लोग है। उस समय रामनगर के लोागो ने कोई बड़ी आवाज नहीं उठायी ।

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