ब्लैक कार्बन और धूल के कणों में वृद्धि से हिमालयी क्षेत्र में गर्मी बढ़ने की आशंका , उत्तराखंड को भारी खतरा जलवायु में परिवर्तन के लिए कारण मानवजनित कृत्य

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देहरादून हिमालय में ग्लेशियर पिघलने और हिमालय राज्यों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। हिमालय की जलवायु बदलने लगी है। अब हिमालय के वातावरण को ठंडा रखने वाले सल्फेट कण की मात्रा घटने लगी है और ब्लैक कार्बन और धूल कणों से गर्मी बढ़ने लगी है। एक नए अध्ययन से यह चिंताजनक जानकारी निकलकर आई है। 

अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल एटमॉस्फियरिक पॉल्यूशन रिसर्च के ताजा अंक में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। शोध 1980 से 2023 के बीच आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और नतीजे चौंकाने वाले आए सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, पश्चिमी हिमालय में खासकर 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सल्फेट एरोसोल (एसओ4) की मात्रा में  कमी आई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन कणों में कमी और सतह के पास बढ़ते तापमान के बीच संबंध साफ दिखाई देता है। 

नासा के एम ई आर आर ए – 2  से लिए गए आंकड़ों के जरिए हिमालय क्षेत्र की अलग अलग ऊंचाई पर सल्फेट एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ यानी एओडी के लंबे समय तक आने वाले बदलावों को अध्ययन किया गया। जिससे पता चला कि 4 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले उत्तर-पश्चिमी हिमालय में सल्फेट एरोसोल की मात्रा में बेहद गिरावट आ रही है, जबकि यह कण हिमालय के वातावरण को ठंडा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

शोध में पश्चिमी हिमालय के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को शामिल किया गया और सबसे बड़ी चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि सल्फेट कणों के गिरावट वाले क्षेत्रों के सतह के तापमान में वृद्धि पाई गई। सल्फेट एरोसोल वातावरण में सूर्य के विकिरण को प्रभावित कर सकते हैं और सामान्य तौर पर विकिरण के एक हिस्से को वापस अंतरिक्ष की ओर बिखेरकर क्षेत्रीय शीतलन प्रभाव पैदा करते हैं। शोध में कहा गया है कि हिमालय की ठंडी जलवायु में परिवर्तन के लिए कारण मानवजनित कृत्य हैं। 

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