अडानी गुप उतराखड की जनता को मुर्ख नही बना सकती है

ख़बर शेयर करें

क्या कहती है विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) सभी उपभोक्ताओं को समझना जरूरी है।

विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार, उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट प्रीपेड मीटर या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार है, और वितरण कंपनियों (Discoms) के लिए उपभोक्ताओं पर जबरदस्ती स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना कानूनी नहीं है, क्योंकि यह अधिनियम के प्रावधानों और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिससे कई राज्यों में उपभोक्ता विरोध कर रहे हैं और कानूनी मामले चल रहे हैं।।

मुख्य बिंदु:

धारा 47(5) (विद्युत अधिनियम 2003): यह धारा स्पष्ट करती है कि यदि कोई व्यक्ति बिजली की आपूर्ति पूर्व-भुगतान (pre-payment) मीटर के माध्यम से लेना चाहता है, तो वितरण लाइसेंसधारी (Discom) उसे सुरक्षा जमा (security deposit) की मांग नहीं कर सकता है, और उपभोक्ता को प्रीपेड या पोस्टपेड का विकल्प चुनने का अधिकार देता है।

वैकल्पिक विकल्प: यह अधिकार उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर या पारंपरिक पोस्टपेड मीटर में से किसी एक को चुनने की स्वतंत्रता देता है,और इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

नियामक आयोगों की भूमिका: कई राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERCs) और उपभोक्ता परिषदें इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं कि अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं के पास यह विकल्प है और वे केवल “स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए बाध्य” नहीं हैं।

कानूनी स्थिति: स्मार्ट मीटर अनिवार्य करने के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों में जनहित याचिकाएँ (PILs) दायर की गई हैं, जो इस बात पर जोर देती हैं कि नियम अधिनियम से ऊपर नहीं हो सकते और उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष:
जनता को जागरूक रहना चाहिए और यदि कोई कंपनी या प्राधिकरण जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपता है, तो उन्हें विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि यह कानून उन्हें प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार देता है।

You cannot copy content of this page