उत्तराखंड पीसीएस सीनियरिटी विवाद खत्म
नैनीताल। उत्तराखंड के पीसीएस अधिकारियों के बीच सालों पुरानी वरिष्ठता की जंग अब खत्म होने के आसार बन गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार और सीधी भर्ती के पीसीएस अधिकारियों की विशेष अपीलों को खारिज करते हुए प्रमोटी अधिकारियों को पहली अक्टूबर 2007 से नियमित नियुक्ति व वरिष्ठता का लाभ देने का महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है। साथ ही सरकार को तीन माह के भीतर नई संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
दरअसल वरिष्ठता का यह विवाद 2012 से कोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा व न्यायमूर्ति आलोक अराधे की संयुक्त पीठ सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई की।
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि पदोन्नति के जरिए नियुक्त डिप्टी कलेक्टर अपनी वरिष्ठता का लाभ अपनी सेवा अवधि के आधार पर, तदर्थ नियुक्ति की तारीख से पाने के अधिकारी हैं। कोर्ट ने राज्य में पदोन्नति प्राप्त और सीधे भर्ती हुए डिप्टी कलेक्टरों केबीच वरिष्ठता अधिकारों को लेकर पहले दिए गए निर्णयों में संशोधन करते हुए निर्णय सुनाया है।
विवाद का मुख्य बिंदु
विवाद का मुख्य बिन्दु यह था कि क्या पदोन्नति पाए अधिकारियों को नियमितीकरण के बाद अपनी वरिष्ठता तय करते समय तदर्थ सेवा अवधि को भी जोड़ने का अधिकार है।
नियम 24(4) के अनुसार, यदि कोटे के भीतर की गई पदोन्नति बाद में नियमित कर दी जाती है, तो उस अधिकारी की निरंतर तदर्थ सेवा को पक्ष में गिना जा सकता है। न्यायालय ने माना कि पदोन्नत अधिकारी इस प्रविधान का लाभ पाने के पात्र हैं और यदि उनकी तदर्थ सेवा एक वर्ष से अधिक रही है, तो उसे वरिष्ठता निर्धारण से बाहर नहीं किया जा सकता।
