पहाड़ जाने वाले मार्गों पर लगा भीषण जाम, समय पर इलाज न मिलने से बुजुर्ग की मौत, कौन जिम्मेदार ?

हल्द्वानी के पहाड़ी मार्गों पर लगे भारी जाम के कारण एम्बुलेंस और निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ताजा मामले में हार्ट अटैक के बाद अस्पताल ले जाए जा रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग की जाम में फंसने से समय पर इलाज न मिलने पर मौत हो गई।
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रानीबाग और काठगोदाम के पास ट्रैफिक जाम में एक घंटे तक फंसी रही मरीज की गाड़ी, बेस अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित,इससे भी पहिले एक महिला व बच्चा भी एम्बुलंेस में 10 घंटे जाम में फंसने से मृत्यु हो गई फिर भी प्रशासन व सरकार ने सबक नहीं ली ,कहा ऐसी घंटनाएं तो होती रहती है।हल्द्वानी के पहाड़ी मार्गों पर लगे भारी जाम के कारण एम्बुलेंस और निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ताजा मामले में हार्ट अटैक के बाद अस्पताल ले जाए जा रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग की जाम में फंसने से समय पर इलाज न मिलने पर मौत हो गई।
बाहर से आने वाले वाहनों को पहाड़ नहीं चढ़ने दिया जाय ,काठगोदाम ,हल्द्वानी में पार्किग व्यवस्था बनाई जाय लेकिन जिला प्रशासन व सरकार को स्थानीय लोगों से क्या लेना देना सरकािर की तरफ से मरे या बचे कोई र्फक नहीं पड़ता है।

हल्द्वानी, । पहाड़ की ओर जाने वाले मार्गों पर इन दिनों लग रहा जाम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है। रानीबाग, काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव के बीच लोगों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। जाम के कारण जहां लोगों का समय तो बर्बाद हो रहा है, वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।
सोमवार को डोलमार के तोक डोबरा निवासी 70 वर्षीय थान सिंह जीना की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाते समय रानीबाग के पास लंबे जाम में फंसना पड़ा। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के चलते उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका। परिजनों के अनुसार, थान सिंह जीना घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आया। इसके बाद उनके बेटे और अन्य लोग उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए निजी वाहन से रवाना हुए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एंबुलेंस का इंतजार करने पर और अधिक समय लगने की आशंका थी, इसलिए उन्हें निजी वाहन से ही अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। सामान्य परिस्थितियों में डोलमार क्षेत्र से अस्पताल पहुंचने में करीब 20 से 25 मिनट का समय लगता है, लेकिन रानीबाग के पास वाहन लंबे जाम में फंस गया।वाहन करीब एक घंटे तक जाम में ही फंसा रहा
परिजनों के अनुसार, वाहन करीब एक घंटे तक जाम में ही फंसा रहा। इसके चलते अस्पताल पहुंचने में डेढ़ घंटे से अधिक का समय लग गया। बेस अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने थान सिंह जीना को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में जाम की समस्या को लेकर नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों के साथ-साथ रोजाना इस मार्ग से आने-जाने वाले स्थानीय लोगों को भी जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है।सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है, जब किसी मरीज को आपात स्थिति में अस्पताल ले जाना हो। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से रानीबाग, काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को बेहतर करने व आपातकालीन स्थिति में वाहनों के लिए रास्ता सुगम बनाने की मांग की है।
जाम न होता तो शायद बच जाती जान

  • पिताजी को अचानक हार्ट अटैक आया था और उनकी हालत गंभीर थी। उन्हें जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए निजी वाहन से निकले, लेकिन जाम में करीब एक घंटे तक फंसे रहे। आपात स्थिति में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है और जाम के कारण अस्पताल पहुंचने में काफी देर हो गई।जबकि वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया ,उन्होने हमारी बात नहीं सुनी ,अगर पुलिस चाहती तो जाम से निकाल सकती लेकिन मित्र पुलिस शत्रु पुलिस बनी … जितेन्द्र सिंह जीना, पुत्र
  • रानीबाग और आसपास के क्षेत्र में जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। सामान्य यातायात में जाम परेशानी का कारण होता है, लेकिन किसी मरीज को अस्पताल ले जाते समय यही जाम जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। प्रशासन को इस दिशा में ठोस यातायात व्यवस्था करनी चाहिए। … गोविंद फर्तयाल, स्थानीय
  • ताऊजी की मौत से परिवार और क्षेत्र में शोक है। इस घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्थिति में जाम से निपटने की व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। रानीबाग क्षेत्र में जाम की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने में इस तरह की देरी न हो। … कौशल जीना
    पुलिस का बयान
    पुलिस की ओर से पहले भी अपील की गई है कि किसी भी मरीज या अन्य आपात स्थिति में 112 नंबर पर सूचना दी जाए। यदि कोई व्यक्ति निजी वाहन से मरीज को अस्पताल लेकर जा रहा है तो वह अपने नजदीकी थाना या चौकी को सूचित करने के साथ ही 112 पर कॉल कर सकता है। सोमवार को पुलिस के पास ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि किसी मरीज को जाम में फंसे वाहन से अस्पताल ले जाया जा रहा है। यदि पुलिस को इसकी जानकारी मिलती तो तत्काल संज्ञान लेकर मरीज को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता उपलब्ध कराया जाता। पुलिस का प्रयास रहता है कि आपात स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए।

        
		
		
                    
                
	            

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